Monday, March 7, 2011

नारी


बनिस्बत एक खुबसूरत तस्वीर के
हकीकत के वजूद में आ चुकी है नारी
नारी- जिसे कमजोर कह कर ख़ारिज नहीं कर सकते
जो शामिल है
आपके हर अहम् फैसलों में कही न कही
बदल सकती है जो तस्वीर- तकदीर के हर पहलू को
लड़कर पाई है उसने ये हैसियत
कोई अहसान नहीं किया आपने उस पर
वो जी सकती है अपने दम पर
बर्बर ज़माने के हर जुल्म से जूझ कर
पाई इस हैसियत को
आप सलाम करे न करे
वो बढती जाएगी अपनी उस राह पर
जहा मंजिल उसका अंजाम तय नहीं कर सकती
बल्कि वो तय करेगी अपने अंजाम लायक मंजिल
-दिलीप लोकरे
इंदौर

Sunday, April 18, 2010




विजयादुर्गा संस्थान केरी, फोंडा गोवा

Wednesday, March 31, 2010

कुछः चित्र है जो विभिन्न अवसरो पर अलग-अलग स्थानो पर लिये गये है

  1. ग्रामीण भारत में यह दृश्य आम हैं लेकिन हमें देखने कि फुरसत नहीं
प्रकृति के सानिध्य में ऐसे झरने अब देखने को कम ही मिलते हैं .


शहरी बच्चों में से कितनो ने कि बैलगाड़ी कि सवारी


ये मस्ती ,ये लचक मंच के कार्यक्रम में मिलती है क्या



सुबह का कोहरा




आँखों कि चमक





मासूमियत






मक्खी वो भी इतनी बड़ी







छठापूजा








कार्तिक मेला ,ओम्कारेश्वर









बड़ा तालाब भोपाल










स्नेह , मांडव











पशु पालक राजस्थान